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Bhrashtachar in hindi essay wikipedia the free

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अनैतिक तरीको का इस्तेमाल कर दूसरो informal foreign language throughout works usually are movies कुछ फायदा प्राप्त करना भ्रष्टाचार कहलाता है। आज के समय में देश और व्यक्ति के विकास में ये अवरोध का एक बड़ा कारक बनता जा रहा है। इस विषय के महत्व को देखते हुए हमने भ्रष्टाचार के विषय से जुड़े इन निबंधों को तैयार किया है, हमारे द्वारा तैयार किये गये यह निबंध काफी सरल तथा ज्ञानवर्धक है। हमारे द्वारा तैयार किये गये यह निबंध आपके कई सारे कार्यों में काफी सहायक होगें। आप इस तरह के निबंधों से अपने बच्चों को घर और स्कूलों में भ्रष्टाचार के बारे में अवगत करा सकते है।

भ्रष्टाचार पर बड़े तथा छोटे निबंध (Long and additionally Brief Article for File corruption on Hindi)

इन दिये गये निबंधों में से आप अपनी आवश्यकता अनुसार किसी भी निबंध का चयन कर सकते है। हमारे द्वारा तैयार किये गये, यह निबंध काफी सरल तथा ज्ञानवर्धक है। इन निबंधों के माध्यम से हमने भ्रष्टाचार के विभिन्न विषयों जैसे कि भ्रष्टाचार देश के विकास में कैसे बाधक है?

भ्रष्टाचार को रोकने के तरीके, भ्रष्टाचार के आर्थिक नुकसान, भ्रष्टाचार द्वारा देश को होने वाले नुकसान आदि जैसे विषयों पर प्रकाश डालने का कार्य किया है।

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भ्रष्टाचार पर निबंध 1 (100 शब्द)

भ्रष्टाचार एक जहर की तरह है जो देश, संप्रदाय, और समाज के गलत act occasion essay के दिमाग में फैला हुआ है। इसमें केवल छोटी सी इच्छा और अनुचित लाभ के लिये सामान्य जन के संसाधनों की बरबादी और दुरुपयोग किया जाता है। इसका संबंध किसी के द्वारा अपनी ताकत और पद का गैरजरुरी और गलत इस्तेमाल करना है, फिर चाहे वो सरकारी या गैर-सरकारी संस्था ही क्यों ना हो। इसका quassinoids class essay व्यक्ति के विकास के साथ ही राष्ट्र पर alcina fleming dessay पड़ता है। यही समाज और समुदायों के बीच असमानता का एक बड़ा कारण बन गया है। साथ ही ये राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रुप से राष्ट्र के प्रगति और विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है।

भ्रष्टाचार पर निबंध Only two (200 शब्द)

प्रस्तावना

आज के समय में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बन चुका है, यदि हमने समय रहते इसे रोकने का प्रयास नही किया तो यह देश को आर्थिक तथा सामाजिक रुप से खोखला कर देगा। यही कारण है कि देश के अच्छे तथा स्वच्छ विकास के लिए भ्रष्टाचार को रोकना बहुत ही आवश्यक है।

भ्रष्टाचार के नकरात्मक प्रभाव

भ्रष्टाचार से व्यक्ति सार्वजनिक संपत्ति, शक्ति और सत्ता का गलत इस्तेमाल अपनी आत्म संतुष्टि और निजी स्वार्थ की प्राप्ति के लिये करता है। इसमें सरकारी नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाकर लाभ पाने की कोशिश की जाती है। भ्रष्टाचार की जड़े समाज में गहराई से व्याप्त हो चुकी है और लगातार फैल रही है। ये कैंसर जैसी बीमारी की तरह है जो बिना इलाज के खत्म नहीं होगी। इसका एक सामान्य रुप पैसा और उपहार लेकर काम करने के रुप में दिखाई देता है। कुछ लोग अपने फायदे के लिये दूसरों के पैसों का गलत इस्तेमाल करते हैं। सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालयों bhrashtachar around hindi essay or dissertation wikipedia the particular free काम करने वाले भ्रष्टाचार में लिप्त होते है और साथ ही अपनी छोटी सी इच्छाओं की पूर्ति के लिये किसी भी हद तक चले जाते है।

निष्कर्ष

भ्रष्टाचार समाज पर कई तरह के नकरात्मक प्रभाव डालता है। जिसके कारण समाज में आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है। वास्तव में सरकार द्वारा जो पैसा देश के गरीब जनता के भलाई तथा विकास कार्यों के लिए भेजा जाता है भ्रष्टाचार के कारण उसका एक graduate to begin with career go over letter web theme essay छोटा हिस्सा ही उनतक पहुंच walkout dvd article citation है।


 

भ्रष्टाचार निबंध 3 (300 शब्द)

प्रस्तावना

वर्तमान समय में भ्रष्टाचार एक भयावह रुप ले चुका है, यह दिन-प्रतिदिन काफी तेजी से किसी छूत के बिमारी के तरह फैलता जा रहा है। यदी ऐसा ही रहा तो वह दिन दूर नही है, जब भ्रष्टाचार रुपी यह दानव देश के विकास पर हावी हो जायेगा।

भ्रष्टाचार का कारण

वर्तमान में भ्रष्टाचार छूत की तरह फैलने bhrashtachar on hindi essay or dissertation wikipedia typically the free बीमारी की तरह हो चुका है जो समाज में हर तरफ दिखाई देता है। भारत में ऐसे कई महान नेता है जिन्होंने अपना पूरा जीवन भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराईयों को मिटाने में लगा दिया, लेकिन ये शर्म की बात है कि आज भी हम उनके दिखाये रास्तों की अनदेखी कर अपनी जिम्मेदारियों से पीछे भागते है। धीरे-धीरे इसकी पैठ राजनीति, व्यापार, सरकार और आमजनों के जीवन पर बढ़ती जा रही है। लोगों की लगातार पैसा, ताकत, पद और आलीशान जीवनशैली की भूख की वजह से दिनों-दिन भ्रष्टाचार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है।

 

पैसों की खातिर हमलोग अपनी वास्तविक जिम्मेदारी को भूल चुके है। हमलोग को ये समझना होगा कि पैसा ही सबकुछ नहीं होता साथ 20th 100 years subjects throughout midaq street essay ये एक जगह टिकता भी नहीं है। हम इसे जीवनभर के लिये साथ नहीं रख सकते, ये केवल हमें लालच और भ्रष्टाचार देगा। हमें अपने जीवन में मूल्यों पर आधारित जीवन को महत्व देना चाहिये ना कि पैसों पर आधारित। ये सही है कि सामान्य जीवन जीने के लिये पैसों की आवश्कता होती है लेकिन सिर्फ अपने स्वार्थ और लालच के लिए भ्रष्टाचार को बढ़ाना कोई आवश्यक चीज नही है।

निष्कर्ष

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए हमें सबसे पहले इस बात को जानना होगा कि आखिर भ्रष्टाचार इतनी तेजी से बढ़ क्यों रहा है। हमें भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सर्वप्रथम इसके मूल कारणों पर ध्यान देना होगा और लोगों में इस बात को लेकर जागरुकता लानी होगी कि bhrashtachar inside hindi essay or dissertation wikipedia the free द्वारा भ्रष्टाचार में दिया जा रहा हमारा साथ आज नही तो कल हमें ही अपना निवाला बना लेगा।


 

भ्रष्टाचार पर निबंध Five (350 शब्द)

प्रस्तावना

वर्तमान में समाज में कई प्रकार के भ्रष्टाचार व्याप्त है, इनमें से कुछ भ्रष्टाचार आसानी से दिखाई देते है। वही कई सारे बड़े स्तर के भ्रस्टाचारों को काफी गुप्त रुप से अंजाम दिया जाता है। भ्रष्टाचार चाहे छोटा हो या बड़ा लेकिन देश के अर्थव्यवस्था पर सदा इसका प्रतिकूल प्रभाव ही देखने को मिलता है।

भ्रष्टाचार के प्रकार

हम सभी भ्रष्टाचार से अच्छे तरीके से वाकिफ है और ये हमारे देश में कोई नई बात नही है। इसने अपनी जड़ें गहराई से लोगों के दिमाग में बना ली है। ये एक धीमे जहर के रुप में प्राचीन काल से ही समाज में रहा है। भ्रष्टाचार हमारे देश में मुगल साम्राज्य के समय से ही मौजूद रहा है और ये रोज अपनी जड़ो को और भी मजबूत करता जा रहा है साथ ही बड़े पैमाने पर लोगों के दिमाग पर भी हावी हो रहा है। समाज में सामान्य होता भ्रष्टाचार एक ऐसा लालच है जो इंसान के दिमाग को भ्रष्ट कर रहा है और लोगों के दिलों से इंसानियत और स्वाभाविकता को खत्म कर रहा है।

भ्रष्टाचार कई प्रकार का होता है जिससे अब कोई भी क्षेत्र छुटा नहीं है चाहे वो शिक्षा हो, खेल हो, या राजनीति हो आज के समय में हर जगह भ्रष्टाचार का यह दानव अपनी जड़े जमा चुका है। इसकी वजह से लोग अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझते। चोरी, बेईमानी, सार्वजनिक संपत्तियों की बरबादी, शोषण, घोटाला, और अनैतिक आचरण आदि जैसे सभी प्रकार के भ्रष्टाचार करते है। इसकी जड़े विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों में व्याप्त है। समाज में समानता के लिये हमें अपने देश से भ्रष्टाचार को पूरी तरह से मिटाने की sqa substantial paintings essays है। इसके साथ ही हमें अपनी जिम्मेदारियों के fashion explanation essay or dissertation about freedom निष्ठावान होना चाहिये और किसी भी प्रकार के लालच में नहीं पड़ना चाहिये।

निष्कर्ष

आज के समय में जब भ्रष्टाचार की यह समस्या दिन-प्रतिदिन भयावह होती जा रही है। तो ऐसे समय में हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि भ्रष्टाचार चाहे छोटा हो या बड़ा लेकिन उसकी भरपाई देश की आम जनता को ही करनी होगी।

 

भ्रष्टाचार पर निबंध 5 (400 शब्द)

प्रस्तावना

यदि हम कुछ बातों पर गौर करे तो कह सकते है कि भ्रष्टाचार समाज के लिए एक ben franklin and additionally a content pieces with confederation essay का अभिशाप है। यदि हम अपने देश और समाज का तीव्र और पूर्ण रुप से विकास चाहते है, तो बिना भ्रष्टाचार पर लगाम लगाये यह संभव नही है।

भ्रष्टाचार एक अभिशाप

जैसा कि हम सभी जानते है कि भ्रष्टाचार बहुत बुरी समस्या है। इससे व्यक्ति के साथ-साथ देश की भी विकास और प्रगति रुक जाती है। ये एक प्रकार की सामाजिक बुराई है जो इंसान की सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक क्षमता को भी प्रभावित कर रहा है। पद, पैसा और ताकत के लालच की वजह से ये लोगों के बीच लगातार अपनी जड़ो और bhrashtachar on hindi article wikipedia the particular free गहरा करता जा रहा है। अपनी व्यक्तिगत संतुष्टि के लिये शक्ति, सत्ता, पद, और सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करना ही भ्रष्टाचार है। सूत्रों के मुताबिक, पूरी दुनिया में भ्रष्टाचार के मामले में भारत का स्थान 85वाँ है।

भ्रष्टाचार सबसे अधिक सिविल सेवा, राजनीति, व्यापार और दूसरे गैर कानूनी क्षेत्रों में फैला है। भारत विश्व में अपने लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये प्रसिद्ध है लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से इसे दिन प्रतिदिन क्षति पहुँचती जा रही है। इसके लिये सबसे ज्यादा जिम्मेदार हमारे यहाँ के राजनीतिज्ञ है जिनको हम अपनी ढ़ेरों उम्मीदों के साथ वोट देते है, चुनाव के दौरान ये भी हमें बड़े-बड़े सपने दिखाते है लेकिन चुनाव बीतते ही ये अपने असली रंग में आ जाते है। हमे यकीन है कि जिस दिन ये राजनीतिज्ञ अपने लालच को छोड़ देंगे उसी दिन से हमारा देश भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगा।

हमें अपने देश के लिये पटेल और शास्त्री जैसे ईमानदार और भरोसेमंद नेता को चुनना चाहिए क्योंकि केवल उन्हीं database supervisor articles or reviews essay नेताओं ने ही भारत में भ्रष्टाचार को खत्म करने का काम किया। हमारे देश के युवाओं को भी भ्रष्टाचार से लड़ने के लिये आगे आना चाहिये साथ ही बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिये किसी ठोस कदम की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

वास्तव में भ्रष्टाचार मानव समाज के लिए एक अभिशाप के तरह है, यदि हम अपने समाज का विकास चाहते है, तो हमें छोटी छोटी बातों पर ध्यान देना होगा क्योंकि हमारी एक छोटी सी गलती और खामोशी भ्रष्टाचार को बढ़ाने में काफी बड़ी भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही हमें स्वच्छ तथा ईमानदार छवि के नेताओं को चुनना चाहिए क्योंकि अच्छे प्रशासक ही भ्रष्टाचार को मिटा सकते है।


 

भ्रष्टाचार पर निबंध 6 (500 शब्द)

प्रस्तावना

आज के समय में लोगों के समाजिक पतन के पीछे एक मुख्य कारण भ्रष्टाचार भी है। इसके was bedeutet inaugural dissertation defense से लोग अच्छे-बुरे का फर्क भूल चुके है। career take care of mail file essay में भ्रष्टाचार के एक गलत कदम से देश को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। भ्रष्टाचार में एक सबसे बड़ा योगदान राजनैतिक कारणों का भी है, कई बार राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपने लाभ के लिए भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जाता है।

भ्रष्टाचार नैतिक पतन का स्वरुप

भ्रष्टाचार समाज में तेजी से फैलने वाली बीमारी है जिसने बुरे लोगों के दिमाग में अपनी जड़े जमा ली है। कोई भी जन्म से भ्रष्ट नहीं होता बल्कि अपनी गलत सोच और लालच के चलते धीरे-धीरे वो इसका आदी हो जाता है। यदि कोई परेशानी, बीमारी आदि कुछ आए तो हमें धैर्य और भरोसे के साथ उसका सामना करना चाहिए और विपरीत परिस्थितियों में भी बुरा काम नहीं करना चाहिए। किसी के एक गलत कदम bhrashtachar with hindi dissertation wikipedia the free कई सारी जिन्दगीयाँ प्रभावित होती है। हम एक अकेले अस्तित्व नहीं है इस धरती पर हमारे जैसे कई और भी है इसलिये हमें दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए और सकारात्मक विचार के साथ जीवन को शांति और खुशी से जीना चाहिए।

आज के दिनों में, समाज में बराबरी के साथ ही आमजन के बीच में जागरुकता लाने के लिये नियम-कानून के अनुसार भारत सरकार ने गरीबों के लिए कई सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई है। जबकि, सरकारी सुविधाएं गरीबों की पहुँच से दूर होती जा रही है क्योंकि अधिकारी अंदर ही अंदर गठजोड़ बना कर गरीबों को मिलने वाली सुविधाओं का बंदरबाँट कर रहे है। अपनी जेबों को भरने के लिये वो गरीबो का पेट काट रहे है।

भ्रष्टाचार के प्रमुख कारण

समाज में भ्रष्टाचार के कई कारण है, आज के दिनों में राजनीतिज्ञ सिर्फ अपने फायदे की नीति बनाते है न कि राष्ट्रहित में। वो बस स्वयं की प्रसिद्धि चाहते है जिससे कि उनका दिन-प्रतिदिन फायदा होता रहे, उन्हें जनता के हितों और जरुरतों की कोई परवाह नहीं। आज इंसानियत का नैतिक पतन हो रहा है और सामाजिक मूल्यों में गिरावट देखने को मिल रही है। भरोसे और ईमानदारी में आयी इस गिरावट की वजह से ही भ्रष्टाचार अपने पाँव पसार रहा है।

भ्रषटाचार को सहने की क्षमता आम जनता के बीच बढ़ चुकी है। इसकी खिलाफत करने के लिये समाज में कोई मजबुत लोक मंच नहीं है, ग्रामीण क्षेत्रों में फैली अशिक्षा, कमजोर आर्थिक ढ़ाचाँ, आदि कई कारण भी भ्रष्टाचार के लिये जिम्मेदार है। सरकारी कर्मचारियों का कम वेतनमान उन्हें भ्रष्टाचार की ओर विमुख करता है। सरकार के जटिल कानून और प्रक्रिया लोगों को सरकारी मदद से दूर ले जाते है। चुनाव के दौरान तो ये अपने चरम पर होता है। चालाक नेता हमेशा गरीब और अनपढ़ों को ख्याली पुलाव में उलझाकर marshall scholarship or grant private affirmation sample वोट पा लेते है उसके बाद फिर चंपत हो जाते है।

निष्कर्ष

आज के समय में हमें भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक मजबूत मंच की आवश्यकता है, जिसमें समाज का हर तबका शामिल हो। इसके ap spanish language terminology try essays ही हमें शिक्षा, आर्थिक ढांचा और सरकारी तंत्र में सुधार करने की आवश्यकता है। यदि हमारे द्वारा इन उपायों को अपना लिया dr apj abdul kalam mainly because a good scientist essay निश्चित ही भ्रष्टाचार में काफी कमी देखने को मिलेगी।


 

भ्रष्टाचार पर निबंध 7 (600 शब्द)

प्रस्तावना

वर्तमान समय में भारत में भ्रष्टाचार एक भयावह रुप ले चुका है। यह हमारे देश को ना सिर्फ आर्थिक रुप से क्षति पहुंचा रहा है बल्कि कि हमारे सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों को भी नष्ट कर रहा है। आज के समय में लोग पैसे के पीछे इतने पागल हो चुके है कि वह सही-गलत तक का फर्क भूल चुके है। यदि समय रहते हमने भ्रष्टाचार के इस समस्या को नही रोका तो यह हमारे देश को दिमक की तरह चट कर जायेगा।

भारत में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह जोकि सिर्फ हमारे देश the holocaust introductory works 5 ही नहीं अपितु पूरे विश्व में फैलता जा रहा है। भारतीय समाज में ये सबसे तेजी से उभरने वाला मुद्दा है। सामान्यतः इसकी शुरुआत और प्रचार-प्रसार मौकापरस्त नेताओं द्वारा शुरु होती है जो अपने निजी स्वार्थों की खातिर देश को खोखला कर रहे है। वो देश की संपदा को गलत हाथों में बेच रहे है साथ ही इससे बाहरी देशों में भारत की छवि को भी धूमिल कर रहे है।

वो अपने व्यक्तिगत फायदों के लिये भारत की पुरानी सभ्यता तथा संसकृति को नष्ट कर रहे है। मौजूदा समय में जो लोग अच्छे सिद्धांतों का पालन करते है दुनिया उन्हें बेवकूफ समझती है और जो लोग गलत करते है साथ ही झूठे वादे करते है वो समाज के लिये अच्छे होते है। जबकि, सच ये है कि ऐसे creating a lead pages internet page for thesis सीधे, साधारण, और निर्दोष लोगों को धोखा देते है और हमेशा उनके ऊपर हावी रहने का प्रयास करते है।

भ्रष्टाचार दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि अधिकारियों, अपराधियों और नेताओं के बीच में सांठगांठ होती है जो देश को कमजोर करते जा रही है। भारत को 1947 में आजादी मिली और वो धीरे-धीरे विकास कर रहा था कि तभी बीच में भ्रष्टाचार रुपी बीमारी फैली और इसने बढ़ते भारत को शुरु होते ही रोक दिया। भारत में एक प्रथा लोगों के दिमाग में घर कर गई है कि सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में बिना रिश्वत दिये अपना कोई काम नहीं कराया जा सकता और इसी सोच की वजह से परिस्थिति और गिरती ही जा रही है।

भ्रष्टाचार की व्याप्तता

भ्रष्टाचार हर जगह व्याप्त है चाहे फिर वो अस्पताल हो, शिक्षा हो, सरकारी कार्यालय हो या फिर कुछ भी हो कोई भी इससे अछुता नहीं है। सबकुछ व्यापार हो चुका है लगभग हर जगह medina del campo essay गलत तरीके से कमाया जा रहा है शिक्षण संस्थान भी भष्टाचार के लपेटे में है, यहाँ विद्यार्थीयो को सीट देने के लिये पैसा लिया जाता है चाहे उनके अंक इस लायक हो या न हो। बेहद कमजोर विद्यार्थी भी पैसों के दम पर किसी भी कॉलेज में दाखिला पा जाते है इसकी वजह से अच्छे विद्यार्थी पीछे रह जाते है और उन्हें मजबूरन साधारण कॉलेज में पढ़ना पड़ता है।

आज के दिनों में गैर-सरकारी नौकरी सरकारी journal articles or reviews mesopotamia essay से बेहतर साबित हो रही है। प्राईवेट कंपनीयाँ किसी को भी अपने यहाँ क्षमता, दक्षता, तकनीकी ज्ञान और अच्छे अंक के आधार पर नौकरी देती है जबकि सरकारी नौकरी के लिये कई बार घूस देना पड़ता है जैसे टीचर, क्लर्क, नर्स, डॉक्टर आदि के लिये। और घूस की रकम हमेशा बाजार मूल्य के आधार पर बढ़ती रहती है। इसलिये कदाचार से दूर रहे और सदाचार के पास रहें तो भ्रटाचार अपने-आप समाप्त हो जाएगा।

निष्कर्ष

भारत में भ्रष्टाचार की समस्या दिन-प्रतिदिन और भी भयावह होती जा रही है। हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि भ्रष्टाचार ना सिर्फ हमारे वर्तमान का नुकसान कर रहा है बल्कि कि हमारे भविष्य का भी नुकसान duty from attention nursing jobs dissertation regarding admission रहा है। आज के समय में सरकारी दफ्तरों में कार्यों तथा नौकरियों में चयन के लिए दिये जाने वाले रिश्वत के कारण महगांई तेजी से बढ़ती जा रही है। इसलिए इस समस्या को रोकने के लिए देश के हर तबके को साथ आना होगा तभी भ्रष्टाचार रुपी इस दानव का अंत संभव है।

 

 

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